चकराता में बॉबी पंवार के समर्थन में दिख रहे भाजपाई, कांग्रेस ने भाजपा और स्वाभिमान मोर्चा के बीच मिलीभगत का लगाया आरोप

चकराता। जौनसार-बावर की राजनीति में इन दिनों नए सियासी समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष बॉबी पंवार द्वारा चकराता विधायक प्रीतम सिंह और उनके भाइयों के खिलाफ मोर्चा खोलने के बाद अब इस मामले में भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं की भूमिका को लेकर भी राजनीतिक बहस छिड़ गई है।

बॉबी पंवार द्वारा विधायक प्रीतम सिंह, उनके भाई एवं पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष चमन सिंह तथा पूर्व ब्लॉक प्रमुख राजपाल सिंह के खिलाफ आवाज उठाए जाने के बाद क्षेत्र की राजनीति में हलचल बढ़ गई है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच कुछ भाजपाइयों का बॉबी पंवार के समर्थन में दिखाई देना चर्चा का विषय बन गया है।

क्या चकराता में बदल रहे हैं राजनीतिक समीकरण?

चकराता विधानसभा में लंबे समय से कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक मुकाबला देखने को मिलता रहा है। ऐसे में विधायक प्रीतम सिंह और उनके भाइयों के खिलाफ बॉबी पंवार के अभियान को लेकर भाजपा के कुछ नेताओं एवं कार्यकर्ताओं का समर्थन सामने आने की चर्चाएं कई राजनीतिक सवाल खड़े कर रही हैं।

इस घटनाक्रम को कांग्रेस अपने राजनीतिक नजरिये से देख रही है। कांग्रेस की ओर से आरोप लगाया जा रहा है कि भाजपा और उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा एक-दूसरे के सहयोगी के रूप में काम कर रहे हैं। हालांकि, इस कथित राजनीतिक तालमेल को लेकर किसी औपचारिक गठबंधन या साझा रणनीति की पुष्टि नहीं हुई है।

2027 से पहले बढ़ेगी सियासी हलचल?

उत्तराखंड में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले चकराता की राजनीति में हर घटनाक्रम को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बॉबी पंवार की सक्रियता, विधायक प्रीतम सिंह के खिलाफ उनका अभियान और इस बीच भाजपा कार्यकर्ताओं की दिखाई दे रही भूमिका आने वाले समय में नए राजनीतिक समीकरणों को जन्म दे सकती है।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह समर्थन केवल स्थानीय मुद्दों तक सीमित है या इसके पीछे कोई व्यापक राजनीतिक रणनीति भी है? इसका जवाब आने वाले दिनों में क्षेत्र के नेताओं के रुख और राजनीतिक गतिविधियों से सामने आ सकता है।